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Archive for March, 2009

>लुई पाश्चर का पत्र मेरी लॉरेंट के नाम
(लुई पाश्चर: बीमारियां कीटाणुओं से फैलती हैं- जिसने सबसे पहले यह पता लगाया वह विश्वप्रसिद्ध वैज्ञानिक)
डियर मादाम,
दो दिन में मेरी सारी जिंदगी ही बदल गई है। मेरा भविष्य, मेरी खुशी सब तुम्हारे हाथों में है। एक बात का मुझे दु:ख है और बहुत दु:ख है कि मैं तुम्हारे काबिल नहीं हूं। तुम मुझे किस कारण पसंद करती हो यह तो नहीं पता लेकिन मैं नहीं चाहता कि तुम्हें आगे जाकर अपने फैसले पर पछतावा करना पड़े. वैसे मेरा दिल तुम्हारे प्यार से भरा हुआ है, इसके बावजूद मैं यह मानता हूं कि मैं तुम्हारे लायक नहीं. मैं तुम्हारे दु:ख का कारण नहीं बनना चाहता.वैसे, मैं जिंदगी भर के लिए तुमसे और विज्ञान से बंध चुका हूं. इस सच्चाई को अब कोई नहीं बदल सकता.
तुम्हारालुई
(पाश्चर जिन वैज्ञानिक के अधीन रिसर्च कर रहा था, मेरी उन्हीं की लड़की थी। काफी मुश्किलों के बाद मेरी और पाश्चर का विवाह हो गया।)

चेखव का पत्र लीडिया के नाम
(चेखव: दुनिया के दो सबसे बड़े कहानीकारों में से एक…रूस का वह महानतम लेखक, जिसने शोषित जनता के हक में अपनी कलम को तलवार बना लिया)२७ मार्च १८९४याल्ता
मधुर लीका,
पत्र के लिए धन्यवाद! यद्यपि तुम यह कहकर मुझे डराना चाहती हो कि तुम जल्दी ही मर जाओगी और मुझे ताना मारती हो कि मैं तुम्हें छोड़ दूंगा, फिर भी तुम्हें धन्यवाद! मैं अच्छी तरह जानता हूं कि तुम मरोगी नहीं और कोई तुम्हें छोड़ेगा नहीं। मैं याल्टा में हूं और खूब मजे कर रहा हूं। नाटकों की रिहर्सल देखने और खूबसूरत फूलों से भरे बागीचों में अपना ज्यादातर वक्त बिताता हूं। भरपेट, मनपसंद खाना खाता हूं और संगीत सुनता हूं। प्यारी लीका याल्टा में बसंत देखना अलग ही अनुभव है. लेकिन एक ख्याल मेरा साथ कभी नहीं छोड़ता कि मुझे लिखना चाहिए…मुझे लिखना चाहिए….मुझे लिखना चाहिए…तुम्हारी याद मुझे आती है लेकिन मैं उदास नहीं हूं.तुम अगर पत्र डालकर मेरी आदत बिगाडऩा चाहो तो पत्र मिलिखोव भेजो. मैं यहां के बाद वहीं पहुंचूंगा और वादा करता हूं कि तुम्हारे पत्रों का जवाब दूंगा. मैं तुम्हारे दोनों हाथों को चूमता हूं।
तुम्हारा अंतेन चैखव

प्रेम पत्रों की श्रृंखला जारी…..

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>रानी विक्टोरिया का पत्र राजकुमार एल्बर्ट के नाम
( रानी विक्टोरिया: इंग्लैंड की वह महान सम्राज्ञी, जिसके राज्य में सूरज कभी नहीं डूबता था।)
१० फरवरी १८४०
प्रियतम,
आज तुम कैसे हो? क्या तुम जी भरकर सोए? मैंने अच्छी तरह आराम किया है, और आज बड़ा हल्का महसूस कर रही हूं। मौसम भी कैसा है आज! मैं समझती हूं, वर्षा रुक जायेगी।एक लाइन लिख भेजना, ओ मेरे प्रियतम दूल्हे, जब तुम तैयार हो जाओ…हमेशा के लिए तुम्हारी सेविका
विक्टोरिया
(यह पत्र रानी वक्टोरिया ने अपने विवाह के ही दिन सुबह लिखा था। )

कवि ब्राउनिंग का पत्र कवियत्री बैरट के नाम
(ब्राउनिंग: इंग्लैंड का विश्वप्रसिद्ध रोमैंटिक कवि, जिसने अनेक महाकाव्य बैलड्स लिखे)
प्रिये,
शब्दों को बार-बार उलट-पुलट रहा हूं लेकिन मेरी भावनाओं को ये शब्द बयान नहीं कर पा रहे। वे तुम्हें नहीं बता पा रहे कि मैं तुम्हें कितना चाहता हूं। वे यह कभी नहीं बता पायेंगे कि तुम मुझे कितनी प्रिय हो, किस तरह तुम मेरी आत्मा का हिस्सा बन चुकी हो। मैं अपने इस प्रेम को बनाये रखना चाहता हूं। भगवान मुझे यह शक्ति दें कि मैं अपने प्यार को हमेशा तुम तक पहुंचाता रहूं। तुम मुझे कितना प्रेम करती हो इसका प्रमाण तुम दे चुकी हो और तुम यह बात नहीं जानती कि यह मेरी लिए कितनी बड़ी बात है. मुझे अपने ऊपर कुछ घमंड भी होने लगा है प्रिये यह सोचकर कि तुम मुझे चाहती हो. तुमने मुझे चाहकर मुझ पर बहुत बड़ा उपकार किया है. हमेशा तुम्हारा
ब्राउनिंग
( बैरट ने अपनी कविताएं ठीक करवाने के लिए कवि ब्राउंनिग के पास भेजी थीं। यहीं से उनका प्रेम भी शुरू हुआ. बाद में दोनों ने विवाह कर लिया था. )

प्रेम पत्रों का सिलसिला कल भी जारी…..

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रानी विक्टोरिया का पत्र राजकुमार एल्बर्ट के नाम
( रानी विक्टोरिया: इंग्लैंड की वह महान सम्राज्ञी, जिसके राज्य में सूरज कभी नहीं डूबता था।)

10 फरवरी १८४०

प्रियतम,

आज तुम कैसे हो? क्या तुम जी भरकर सोए? मैंने अच्छी तरह आराम किया है, और आज बड़ा हल्का महसूस कर रही हूं। मौसम भी कैसा है आज! मैं समझती हूं, वर्षा रुक जायेगी।एक लाइन लिख भेजना, ओ मेरे प्रियतम दूल्हे, जब तुम तैयार हो जाओ…हमेशा के लिए तुम्हारी सेविका

विक्टोरिया

(यह पत्र रानी वक्टोरिया ने अपने विवाह के ही दिन सुबह लिखा था। )



कवि ब्राउनिंग का पत्र कवियत्री बैरट के नाम

(ब्राउनिंग: इंग्लैंड का विश्वप्रसिद्ध रोमैंटिक कवि, जिसने अनेक महाकाव्य बैलड्स लिखे)१२।९।८६

प्रिये.

शब्दों को बार-बार उलट-पुलट रहा हूं लेकिन मेरी भावनाओं को ये शब्द बयान नहीं कर पा रहे। वे तुम्हें नहीं बता पा रहे कि मैं तुम्हें कितना चाहता हूं। वे यह कभी नहीं बता पायेंगे कि तुम मुझे कितनी प्रिय हो, किस तरह तुम मेरी आत्मा का हिस्सा बन चुकी हो। मैं अपने इस प्रेम को बनाये रखना चाहता हूं। भगवान मुझे यह शक्ति दें कि मैं अपने प्यार को हमेशा तुम तक पहुंचाता रहूं। तुम मुझे कितना प्रेम करती हो इसका प्रमाण तुम दे चुकी हो और तुम यह बात नहीं जानती कि यह मेरी लिए कितनी बड़ी बात है। मुझे अपने ऊपर कुछ घमंड भी होने लगा है प्रिये यह सोचकर कि तुम मुझे चाहती हो। तुमने मुझे चाहकर मुझ पर बहुत बड़ा उपकार किया है।

हमेशा तुम्हारा

ब्राउनिंग

( बैरट ने अपनी कविताएं ठीक करवाने के लिए कवि ब्राउंनिग के पास भेजी थीं। यहीं से उनका प्रेम भी शुरू हुआ। बाद में दोनों ने विवाह कर लिया था। )

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>दरवाजे पर दस्तक होती है खट… खट… खट….अंदर से आवाज आती है कौन? पुरुष कहता है मैं। दरवाजा नहीं खुलता। वह लौट जाता है। दूसरे दिन फिर वह आता है. दरवाजे पर फिर से दस्तक होती है खट… खट… खट….अंदर से आवाज आती है कौन? पुरुष कहता है तुम. दरवाजा खुल जाता है. तो ऐसा होता है प्रेम. मैं और तुम जहां पिघलकर एक हो जाते हैं. पहचानना मुश्किल हो जाता है कि यह किसका चेहरा है, किसका हाथ और कौन किसकी पहचान है. खुद को खोना ही पड़ता है प्यार को पाने के लिए. प्रेम के सिलसिले में खतों की बड़ी अहमियत रही है, हमेशा से. प्रेम करना दुनिया का सबसे मुश्किल काम है और उस प्रेम को सही-सही रूप में अभिव्यक्त कर पाना उससे भी मुश्किल. यही वजह है कि प्रेमपत्र सिर्फ भावनाओं की अभिव्यक्ति का साधन भर नहीं रहे, एक दस्तावेज भी बन गये. संसार का सबसे पुराना प्रेम पत्र बेबीलोन के खंडहरों से मिला है. बेबीलोन की किसी युवती का प्रेमी अपनी रातों की बेचैनियां, धड़कनों का कारवां, आंसू और भय समेटकर उससे अपने दिल की बात कहने जब बेबीलोन पहुंचा तो वह युवती वहां से कहीं जा चुकी थी. अपनी सारी बेचैनी लेकर वह युवक वापस नहीं जा सका. उसने वहीं मिट्टी के फर्श पर खोदते हुए लिखा, ‘मैं तुमसे मिलने आया था, तुम नहीं मिली, यह छोटा सा संदेश विरह की जिस भावना से लिखा गया था, उसमें कितनी तड़प शामिल थी, इसका अंदाजा सिर्फ वह युवती लगा सकती थी जिसके लिये इसे लिखा गया. भावनाओं से ओत-प्रोत यह पत्र ईसा से बहुत पहले का है. प्रेम जैसी गाढ़ी, गहरी भावना को अभिव्यक्त करने के लिए शब्द सचमुच नाकाफी होते हैं. तभी तो विश्व के बड़े-बड़े राजा, महाराजा, महारानियां, सेनाध्यक्ष, वैज्ञानिक, लेखक, राजनेता प्रेम की अभिव्यक्ति करते समय खासे नर्वस और नौसिखिये ही नजर आये. उनकी याद आयी है, सांसों जरा धीरे चलो,/धड़कनों से भी इबादत में खलल पड़ता है….तो अपनी धड़कनों पर काबू रखते हुए आइये सुनते हैं इन महान लोगों के प्यार की दास्तान उनके प्रेमपत्रों के जरिये-

अब्राहम लिंकन का पत्र मेरी ओवंस के नाम (स्प्रिंग फील्ड7 मई, १८३७)
(अब्राहम लिंकन: साधारण परिवार का बदसूरत लड़का था जो बाद में अमेरिका का राष्ट्रपति बना…जिसने दासों के व्यापार के बदसूरत धब्बे को अमेरिका के चेहरे से मिटा दिया।)
प्यारी मेरी,
इस पत्र को लिखने से पहले मैं दो बार और लिखने की कोशिश कर चुका हूं। दोनों ही बार मैं संतुष्ट नहीं हुआ और उन्हें तुम तक भेजने से पहले ही फाड़कर फेंक चुका हूं। ऐसा लग रहा है कि कोई भी शब्द मेरी भावनाओं को ठीक-ठीक अभिव्यक्त कर पाने में सक्षम नहीं है। अब यह चिट्ठी जैसी भी बनेगी मैं इसे जरूर भेज दूंगा।जहां मैं रहता हूं स्प्रिंग फील्ड में यहां का जीवन बहुत कठिन है मेरी प्यारी। मैं नहीं चाहता कि तुम यहां आओ और तुम्हारा सामना मुश्किलों से हो। यहां कोई शानो-शौकत नहीं है, गरीबी का आलम है। वैसे मैं तुम्हें आने वाले जीवन में सारे सुख देने की पूरी कोशिश करूंगा लेकिन अभी के जो हालात हैं, उन्हें मैं तुमसे छुपा नहीं सकता। तुम सोच-समझकर फैसला करना। मेरे पत्र के जवाब में तुम खूब लंबा पत्र लिखना। मेरे लिए इस व्यस्त और उजाड़ जीवन में एक बड़ा सहारा बनेगा।
तुम्हारा लिंकन
(यह पत्र लिंकन ने राष्ट्रपति बनने से बहुत पहले अपनी युवावस्था में लिखा था. मेरी ने लिंकन के विवाह प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. )

अगला ख़त कल….

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>वैसे तो इन दिनों ऐसे लोग ही कम मिलते हैं जो यह पूछें की अच्छा कैसे लिखा जाए क्योंकि इन दिनों हर किसी को यही लगता है की वो सर्वश्रेष्ठ लिखता है। फ़िर भी कभी किसी चेहरे पर कप्पुस के सवाल नज़र आते हैं तो अच्छा लगता है। जब सवाल कप्पुस के से हों तो जवाब भी रिल्के का ही होना चहिये।
‘एक ही काम है जो तुम्हें करना चाहिए – अपने में लौट जाओ। उस केन्द्र को ढूंढो जो तुम्हें लिखने का आदेश देता है। जानने की कोशिश करो कि क्या इस बाध्यता ने तुम्हारे भीतर अपनी जड़ें फैला ली हैं ? अपने से पूछो कि यदि तुम्हें लिखने की मनाही हो जाए तो क्या तुम जीवित रहना चाहोगे ?…अपने को टटोलो…इस गंभीरतम ऊहापोह के अंत में साफ-सुथरी समर्थ ‘हाँ” सुनने को मिले, तभी तुम्हें अपने जीवन का निर्माण इस अनिवार्यता के मुताबिक करना चाहिए।’

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कमजोरियां

कमजोरियां
तुम्हारी कोई नहीं थीं
मेरी थी एक
मैं करता था प्यार…

सुख

सुबह खिड़की से बाहर का नजारा
फिर से मिली हुई
पुरानी किताब
उल्लसित चेहरे
बर्फ, मौसमों की आवाजाही
अखबार, कुत्ता,
डायलेक्टिक्स,
नहाना, तैरना, पुराना संगीत
आरामदेह जूते
जज्ब करना नया संगीत
लेखन, बागवानी मुसाफिरी
गाना मिलजुल कर रहना…

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तुम्हें भी याद नहीं, और मैं भी भूल गया
वो लम्हा कितना हसीं था, मगर फिजूल गया….

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