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Archive for March 29th, 2009

>रानी विक्टोरिया का पत्र राजकुमार एल्बर्ट के नाम
( रानी विक्टोरिया: इंग्लैंड की वह महान सम्राज्ञी, जिसके राज्य में सूरज कभी नहीं डूबता था।)
१० फरवरी १८४०
प्रियतम,
आज तुम कैसे हो? क्या तुम जी भरकर सोए? मैंने अच्छी तरह आराम किया है, और आज बड़ा हल्का महसूस कर रही हूं। मौसम भी कैसा है आज! मैं समझती हूं, वर्षा रुक जायेगी।एक लाइन लिख भेजना, ओ मेरे प्रियतम दूल्हे, जब तुम तैयार हो जाओ…हमेशा के लिए तुम्हारी सेविका
विक्टोरिया
(यह पत्र रानी वक्टोरिया ने अपने विवाह के ही दिन सुबह लिखा था। )

कवि ब्राउनिंग का पत्र कवियत्री बैरट के नाम
(ब्राउनिंग: इंग्लैंड का विश्वप्रसिद्ध रोमैंटिक कवि, जिसने अनेक महाकाव्य बैलड्स लिखे)
प्रिये,
शब्दों को बार-बार उलट-पुलट रहा हूं लेकिन मेरी भावनाओं को ये शब्द बयान नहीं कर पा रहे। वे तुम्हें नहीं बता पा रहे कि मैं तुम्हें कितना चाहता हूं। वे यह कभी नहीं बता पायेंगे कि तुम मुझे कितनी प्रिय हो, किस तरह तुम मेरी आत्मा का हिस्सा बन चुकी हो। मैं अपने इस प्रेम को बनाये रखना चाहता हूं। भगवान मुझे यह शक्ति दें कि मैं अपने प्यार को हमेशा तुम तक पहुंचाता रहूं। तुम मुझे कितना प्रेम करती हो इसका प्रमाण तुम दे चुकी हो और तुम यह बात नहीं जानती कि यह मेरी लिए कितनी बड़ी बात है. मुझे अपने ऊपर कुछ घमंड भी होने लगा है प्रिये यह सोचकर कि तुम मुझे चाहती हो. तुमने मुझे चाहकर मुझ पर बहुत बड़ा उपकार किया है. हमेशा तुम्हारा
ब्राउनिंग
( बैरट ने अपनी कविताएं ठीक करवाने के लिए कवि ब्राउंनिग के पास भेजी थीं। यहीं से उनका प्रेम भी शुरू हुआ. बाद में दोनों ने विवाह कर लिया था. )

प्रेम पत्रों का सिलसिला कल भी जारी…..

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रानी विक्टोरिया का पत्र राजकुमार एल्बर्ट के नाम
( रानी विक्टोरिया: इंग्लैंड की वह महान सम्राज्ञी, जिसके राज्य में सूरज कभी नहीं डूबता था।)

10 फरवरी १८४०

प्रियतम,

आज तुम कैसे हो? क्या तुम जी भरकर सोए? मैंने अच्छी तरह आराम किया है, और आज बड़ा हल्का महसूस कर रही हूं। मौसम भी कैसा है आज! मैं समझती हूं, वर्षा रुक जायेगी।एक लाइन लिख भेजना, ओ मेरे प्रियतम दूल्हे, जब तुम तैयार हो जाओ…हमेशा के लिए तुम्हारी सेविका

विक्टोरिया

(यह पत्र रानी वक्टोरिया ने अपने विवाह के ही दिन सुबह लिखा था। )



कवि ब्राउनिंग का पत्र कवियत्री बैरट के नाम

(ब्राउनिंग: इंग्लैंड का विश्वप्रसिद्ध रोमैंटिक कवि, जिसने अनेक महाकाव्य बैलड्स लिखे)१२।९।८६

प्रिये.

शब्दों को बार-बार उलट-पुलट रहा हूं लेकिन मेरी भावनाओं को ये शब्द बयान नहीं कर पा रहे। वे तुम्हें नहीं बता पा रहे कि मैं तुम्हें कितना चाहता हूं। वे यह कभी नहीं बता पायेंगे कि तुम मुझे कितनी प्रिय हो, किस तरह तुम मेरी आत्मा का हिस्सा बन चुकी हो। मैं अपने इस प्रेम को बनाये रखना चाहता हूं। भगवान मुझे यह शक्ति दें कि मैं अपने प्यार को हमेशा तुम तक पहुंचाता रहूं। तुम मुझे कितना प्रेम करती हो इसका प्रमाण तुम दे चुकी हो और तुम यह बात नहीं जानती कि यह मेरी लिए कितनी बड़ी बात है। मुझे अपने ऊपर कुछ घमंड भी होने लगा है प्रिये यह सोचकर कि तुम मुझे चाहती हो। तुमने मुझे चाहकर मुझ पर बहुत बड़ा उपकार किया है।

हमेशा तुम्हारा

ब्राउनिंग

( बैरट ने अपनी कविताएं ठीक करवाने के लिए कवि ब्राउंनिग के पास भेजी थीं। यहीं से उनका प्रेम भी शुरू हुआ। बाद में दोनों ने विवाह कर लिया था। )

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