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Archive for March 30th, 2009

>लुई पाश्चर का पत्र मेरी लॉरेंट के नाम
(लुई पाश्चर: बीमारियां कीटाणुओं से फैलती हैं- जिसने सबसे पहले यह पता लगाया वह विश्वप्रसिद्ध वैज्ञानिक)
डियर मादाम,
दो दिन में मेरी सारी जिंदगी ही बदल गई है। मेरा भविष्य, मेरी खुशी सब तुम्हारे हाथों में है। एक बात का मुझे दु:ख है और बहुत दु:ख है कि मैं तुम्हारे काबिल नहीं हूं। तुम मुझे किस कारण पसंद करती हो यह तो नहीं पता लेकिन मैं नहीं चाहता कि तुम्हें आगे जाकर अपने फैसले पर पछतावा करना पड़े. वैसे मेरा दिल तुम्हारे प्यार से भरा हुआ है, इसके बावजूद मैं यह मानता हूं कि मैं तुम्हारे लायक नहीं. मैं तुम्हारे दु:ख का कारण नहीं बनना चाहता.वैसे, मैं जिंदगी भर के लिए तुमसे और विज्ञान से बंध चुका हूं. इस सच्चाई को अब कोई नहीं बदल सकता.
तुम्हारालुई
(पाश्चर जिन वैज्ञानिक के अधीन रिसर्च कर रहा था, मेरी उन्हीं की लड़की थी। काफी मुश्किलों के बाद मेरी और पाश्चर का विवाह हो गया।)

चेखव का पत्र लीडिया के नाम
(चेखव: दुनिया के दो सबसे बड़े कहानीकारों में से एक…रूस का वह महानतम लेखक, जिसने शोषित जनता के हक में अपनी कलम को तलवार बना लिया)२७ मार्च १८९४याल्ता
मधुर लीका,
पत्र के लिए धन्यवाद! यद्यपि तुम यह कहकर मुझे डराना चाहती हो कि तुम जल्दी ही मर जाओगी और मुझे ताना मारती हो कि मैं तुम्हें छोड़ दूंगा, फिर भी तुम्हें धन्यवाद! मैं अच्छी तरह जानता हूं कि तुम मरोगी नहीं और कोई तुम्हें छोड़ेगा नहीं। मैं याल्टा में हूं और खूब मजे कर रहा हूं। नाटकों की रिहर्सल देखने और खूबसूरत फूलों से भरे बागीचों में अपना ज्यादातर वक्त बिताता हूं। भरपेट, मनपसंद खाना खाता हूं और संगीत सुनता हूं। प्यारी लीका याल्टा में बसंत देखना अलग ही अनुभव है. लेकिन एक ख्याल मेरा साथ कभी नहीं छोड़ता कि मुझे लिखना चाहिए…मुझे लिखना चाहिए….मुझे लिखना चाहिए…तुम्हारी याद मुझे आती है लेकिन मैं उदास नहीं हूं.तुम अगर पत्र डालकर मेरी आदत बिगाडऩा चाहो तो पत्र मिलिखोव भेजो. मैं यहां के बाद वहीं पहुंचूंगा और वादा करता हूं कि तुम्हारे पत्रों का जवाब दूंगा. मैं तुम्हारे दोनों हाथों को चूमता हूं।
तुम्हारा अंतेन चैखव

प्रेम पत्रों की श्रृंखला जारी…..

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