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Archive for December 26th, 2009

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चांद से मेरी दोस्ती
हरगिज न हुई होती
अगर रात जागने
और सड़कों पर फालतू भटकने की
लत न लग गई होती
मुझे स्कूल के ही दिनों में
उसकी कई आदतें तो तकरीबन
मुझसे मिलती-जुलती सी हैं
मसलन वह भी अपनी कक्षा का
एक बैक बेंचर छात्र है
अध्यापक का चेहरा
ब्लैक बोर्ड की ओर घूमा नहीं
कि दबे पांव निकल भागे बाहर…
और फिर वही मटरगश्ती
सारी रात सारे आसमान में…
– राजेश जोशी

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