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Archive for the ‘अशोक वाजपेयी’ Category

>जब हम प्यार करते हैं
तब यह नहीं कि
आकाश अधिक दयालु हो जाता है
या कि सड़कों पर
अधिक खुशी चलने लगती है
बस यही कि कहीं किसी बच्ची को
अपनी छत से उगता सूरज
और पड़ोस की बछिया देखना
अच्छा लगने लगता है
कहीं कोई भीड़ में बुदबुदाते होठों में
प्रार्थना लिए
एक जनाकीर्ण सड़क
सकुशल पार कर जाता है
कहीं कोई शांत मौन जल
कंकड़ से नही, अपने संगीत से
जगाता बैठा रहता है।
जब हम प्यार करते हैं
तो दुनिया को
छोटे-छोटे अंशों में सिद्ध करते हैं
और सुंदर भी, और समृद्ध भी…
हम वसंत को आसानी से काट देते हैं
और उसे एक ऐसे संयोग में गढ़ देते हैंजो
जो न ऋतुगान होता है न टहनियां
और न कोई स्पष्ट आकारन काव्य
और न फूलों, चिडिय़ों का कोई सिलसिला
हम उसे दुनिया के हाथों में फेंक देते है
और दुनिया जब तक उसे देखे-परखे
हम चल देते है
छिप जाते हैंऋतु में या काव्य में
या टहनियों के आकाश में…
अशोक वाजपेयी

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