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Archive for the ‘खरीदार’ Category

>नींद की गोली हूँ
घर में असरदार,
दफ्तर में उपयोगी।
मैं इम्तहान दे सकता हूँ
और गवाही भी।
मैं टूटे प्याले जोड़ सकता हूं।
आपको सिर्फ मुझे ले लेना है,
पिघलने देना है अपनी जीभ के नीचे
और फिर निगल जाना है
एक गिलास पानी के साथ।
मैं बिगड़ी किस्मतें बनाना जानता हूं,
बुरी खबरें पचाना जानता हूं,
अन्याय के एहसास को कम कर सकता हूं,
ईश्वर की कमी को भर सकता हूँ
और विधवाओं के लिए चुन सकता हूं
और आकर्षक नकाब
आप किस सोच में पड़े हैं-
भला मेरी रासायनिक करुणा से
भरोसेमंद क्या होगा!
आप अभी नौजवान हैं।
वक्त है कि सीख लें
अपने आपको ढीला छोड़ देना
कोई जरूरी नहीं कि मुट्ठियां
हमेशा भिंची और चेहरा तना रहे।
अपने खालीपन को मुझे दे दो।
मैं उसे नींद से भर दूंगा।
एक दिन आप शुक्रगुजार होंगे की
मैंने आपको चार पैरों पर चलना सिखाया।
बेच दो मुझे अपनी आत्मायों भी
उसका खरीदार कहां है
कि अब उसे भरमाने के लिए
कोई और शैतान नहीं रहा।

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