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Archive for the ‘चाँद’ Category

>पूरा दु:ख और आधा चाँद
हिज्र की शब और ऐसा चांद

किस मकतल से गुजऱा होगा
ऐसा सहमा-सहमा चांद

यादों की आबाद गली में
घूम रहा है तनहा चांद

मेरे मुंह को किस हैरत से
देख रहा है भोला चांद

इतने घने बादल के पीछे
कितना तनहा होगा चांद।

मकतल- जहां वध किया जाता है

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