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Archive for the ‘जावेद साब’ Category

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सच तो ये है कुसूर अपना है …
चाँद को छूने की तमन्ना की
आसमा को जमीन पर माँगा 
फूल चाहा कि पत्थरों  पर खिले..
काँटों में की तलाश खुशबू की 
आरजू  की कि आग ठंडक दे 
बर्फ में ढूंढते रहे गर्मी 
ख्वाब जो देखा, चाहा सच हो जाये 
इसकी हमको सजा तो मिलनी थी 
सच तो ये है कुसूर अपना है..
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